चंडीगढ़: प्रदर्शनकारी किसानों के खिलाफ पंजाब पुलिस की कार्रवाई पर निशाना साधते हुए संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की राष्ट्रीय समन्वय समिति ने पूरे भारत के किसानों से आज यानी 28 मार्च को देशभर में विरोध-प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। इस बाबत किसान संघ ने बीते रविवार 23 मार्च को बयान में कहा था कि, ‘‘एसकेएम की राष्ट्रीय समन्वय समिति पूरे भारत के किसानों से 28 मार्च को पंजाब में किसानों के विरोध प्रदर्शन पर पुलिस की दमनकारी कार्रवाई के खिलाफ पूरे भारत के जिलों में विरोध-प्रदर्शन करने का आह्वान करती है।”
जानकारी दें कि, SKM ने किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) और एसकेएम (गैर राजनीतिक) सहित सभी किसान संगठनों और मंचों से साझा मुद्दों पर एकता दिखाने तथा ‘‘दमन के खिलाफ एकजुट होने” के लिए आगे आने का आग्रह किया। इस बाबत जारी बयान में कहा गया, ‘‘भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के निर्देश पर, पंजाब पुलिस ने जगजीत सिंह डल्लेवाल और सरवन सिंह पंधेर सहित 350 किसान नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था। पुलिस ने खनौरी और शंभू बॉर्डर पर आंदोलनकारी किसानों के टेंट और मंचों को बुलडोजर से गिरा दिया और ट्रैक्टर, ट्रॉलियों और अन्य उपकरणों को जबरन हटा दिया।”
इस बीच, कई किसान नेताओं के साथ हिरासत में लिए गए वरिष्ठ किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल को बीते रविवार को जालंधर से पटियाला स्थानांतरित कर दिया गया था। जानकारी हो कि पिछले साल 26 नवंबर से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे डल्लेवाल को बुधवार को पंजाब पुलिस द्वारा कई किसानों को हिरासत में लेने के बाद जालंधर में पंजाब आयुर्विज्ञान संस्थान ले जाया गया था। वहीं बाद में, उन्हें जालंधर में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) अतिथि गृह ले जाया गया।
इस बाबत सूत्रों ने बताया था कि रविवार को किसान नेता को पटियाला के एक निजी अस्पताल में लाया गया। पंजाब पुलिस ने बुधवार को मोहाली में पंधेर, डल्लेवाल और कई किसान नेताओं को बुधवार को उस वक्त हिरासत में ले लिया था जब वे चंडीगढ़ में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के बाद लौट रहे थे।
जानकारी दें कि, एसकेएम 30 से अधिक किसान संगठनों का एक समूह है और उसने अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में चंडीगढ़ में धरने का आह्वान किया था। किसानों की इन मांगों में राज्य सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर छह फसलों की खरीद की मांग भी शामिल है। बता दें कि, एसकेएम ने अब निरस्त किए जा चुके तीन कृषि कानूनों के खिलाफ 2020 के आंदोलन का नेतृत्व किया था। वह राज्य द्वारा कृषि नीति को लागू करने, राज्य सरकार द्वारा छह फसलों की एमएसपी पर खरीद, केंद्र के साथ समन्वय के बाद ऋण राहत के लिए कानूनी ढांचा, भूमि जोतने वालों को मालिकाना हक और गन्ने का बकाया भुगतान की मांग भी कर रहा है।